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पतंजलि के योगसूत्र—196 संक्षिप्त सूत्रों का यह ग्रंथ—योग दर्शन की मूल आधारशिला है। इस पुस्तक में योगिराज शैलेन्द्र शर्मा ने अपने गहन साधना-अनुभव के आधार पर प्रत्येक सूत्र का सत्य, प्रामाणिक और अनुभूतिपूर्ण विवेचन प्रस्तुत किया है, जो योग के वास्तविक सार को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
पतंजलि के योगसूत्र, जिसे योगदर्शन के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय दर्शनशास्त्र के छह पारम्परिक दर्शनों में से एक—योग परंपरा का मूल ग्रंथ है। चार संक्षिप्त अध्यायों में निबद्ध 196 सूत्र योगिक ज्ञान के सारतत्त्व पर केंद्रित हैं। संक्षिप्त होने के बावजूद यह योग के पवित्र ग्रंथों में अत्यंत ललित, गूढ़ और प्रेरणादायक माना जाता है।
इनमें वर्णित अवस्थाओं का वास्तविक अर्थ वही साधक पूर्णतः समझ सकता है जिसने उन्हें प्रत्यक्ष साधना में अनुभव किया हो, और योगिराज शैलेन्द्र शर्मा जी ने इस ग्रंथ की ऐसी ही अनुभवसिद्ध, प्रामाणिक और विद्वतापूर्ण व्याख्या प्रस्तुत की है।
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Rohit M. –
The book details one’s journey on the path of yog in sequential detail … the depth & poignancy of this hallowed text could only be decoded by a fully realized being having traversed the path himself!