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नाथ परंपरा का गूढ़ ग्रंथ हठयोग प्रदीपिका हठयोग के रहस्यपूर्ण अभ्यासों को प्रकट करता है। योगिराज शैलेन्द्र शर्मा जी ने इस परंपरा-आधारित अनुभवसिद्ध, प्रामाणिक व्याख्या प्रस्तुत की है।
स्वात्माराम कृत हठयोग प्रदीपिका — प्राचीन रहस्यमय यौगिक ग्रंथों में से एक, हठयोग प्रदीपिका को योग पर सबसे रहस्यमय और पूर्ण कार्य माना जाता है, जिसमें आत्म ज्ञान के मार्ग के प्रत्येक चरण का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। वरिष्ठ योगियों के लिए यह एक संदर्भ ग्रंथ है। पाठ संरचना व संस्कृत शब्दों और शब्दों के उपयोग से इस कार्य को १४वीं–१५वीं शताब्दी के समय का कहा जा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक युग अथवा समय अज्ञात है।
तथ्य केवल यह है कि यह पुस्तक नाथ परंपरा का एक गुप्त खजाना थी और पहली बार १९वीं शताब्दी के मध्य में प्रकाशित हुई थी। लेकिन पुस्तक में वर्णित गुप्त योगाभ्यास प्रकाशन के बाद भी सुरक्षित रूप से संरक्षित रहे।
योगिराज शैलेन्द्र शर्मा जी, महान् योगी गुरु “बाबाजी महाराज” की परंपरा के पाँचवें गुरु, का मानना है कि स्वात्माराम — इस पुस्तक के लेखक — इतिहास के अत्यन्त रहस्यमय व्यक्तित्व हैं। उनके बारे में अन्यत्र कहीं उल्लेख नहीं मिलता। उनका यह विश्वास है कि स्वयं बाबाजी महाराज ने स्वात्माराम नाम से हठयोग प्रदीपिका का लेखन किया है।
जनवरी २०१३ में शैलेन्द्र शर्मा जी ने अपने शिष्यों के साथ संवाद के दौरान इस प्राचीन पाठ और इसमें वर्णित गुप्त योगाभ्यासों की तकनीकों की विस्तृत व्याख्या का अभूतपूर्व कार्य किया। एक अनुभवी योगी, जिसने अपना जीवन इन अभ्यासों को साधने में समर्पित किया, द्वारा की गई यह व्याख्या क्रियायोग परंपरा के पारंपरिक निर्देशों के अनुरूप अत्यंत विधिपूर्वक और प्रामाणिक रूप से की गई है।
Shashank –
A rare gem for understanding hathyog, Only for true seeker of hath/kriya yoga