No products in the cart.
Return To ShopNo products in the cart.
Return To Shop₹1,000.00
यह आधुनिक योगिक टीका, Gorakh Bodh: अमर योगियों की सांध्य भाषा, पाठक को योगिक ज्ञान के छिपे हुए रहस्यों को समझने में मदद करती है। इसमें शब्दों के गहरे अर्थों को बाबाजी क्रिया योग परंपरा के प्रकाश में स्पष्ट किया गया है, जहाँ लेखक प्राचीन शिक्षाओं के सूक्ष्म और गूढ़ पहलुओं को उजागर करते हैं।
गोरख बोध नाथ योगियों का प्राचीन हिंदी ग्रंथ है, जिसे भारत के प्रख्यात सिद्ध गोरखनाथ और उनके अमर गुरु मत्स्येन्द्रनाथ के गहन संवाद के रूप में लिखा गया है। नाथ योगियों ने अपनी साधना को गुप्त रखने के लिए ऐसी सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया, जो केवल दीक्षित शिष्यों के बीच ही समझी जा सकती थी। गोरख बोध की सांध्य भाषा—जिसे उर्ध्व-अधोमुखी भाषा भी कहा जाता है—अपने रूपकों और प्रतीकात्मक संवादों के माध्यम से गूढ़ रहस्यों को छिपाए रहती है, जहाँ साधारण दिखाई देने वाली पंक्तियों के भीतर अत्यंत गहन ज्ञान समाहित होता है।
इसका विषय-वस्तु पहली दृष्टि में अस्पष्ट और धुंधला प्रतीत हो सकता है। इसकी प्राचीन, कम प्रचलित, लोकभाषा-आधारित कवित्वपूर्ण पंक्तियाँ चेतन शून्य, सृष्टि की उत्पत्ति, शाश्वत शब्द, प्राण और श्वास, आत्मा का उद्भव, आंतरिक और बाह्य शून्य, काल का अनुभव तथा आत्मा के कालातीत अस्तित्व जैसे गहरे विषयों की व्याख्या करती हैं।
“गोरख बोध – अमर योगियों की सांध्य भाषा” के लेखक, बाबाजी परंपरा के पंचम गुरु योगीराज शैलेन्द्र शर्मा ने मूल ग्रंथ पर यौगिक दृष्टि डालते हुए इसके गहन रहस्यों को उजागर किया है और क्रिया योग परंपरा के अनुसार नाथ शिक्षाओं की गुप्त सार्थकता की विस्तृत व्याख्या की है। मूल हिंदी श्लोकों के संशोधित अनुवाद के साथ प्रस्तुत यह आधुनिक योगिक टीका उच्चतर योग और उसके वास्तविक लक्ष्य के रहस्यवाद का गंभीर और गहन स्पष्टीकरण प्रदान करती है।
₹1,000.00
Vageesh g. –
It’s been a great learning about Yogis and Guru Gorakhnath. This book explains evening details regarding all the spiritual journey of a yogi 🙏