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“Yogeshwari Shrimadbhagwad Geeta” श्रीमद्भगवद्गीता पर एक दुर्लभ yogic commentary है, जिसे सिद्ध योगी योगिराज शैलेन्द्र शर्मा जी ने अपनी गहन साधना और गुरु-परंपरा से प्राप्त अनुभूत ज्ञान के आधार पर लिखा है। यह पुस्तक गीता के गूढ़ रहस्यों, पुरातन योग-साधनाओं और ब्रह्मविद्या को सरल, स्पष्ट और अनुभवजन्य रूप में प्रस्तुत करती है।
‘Yogeshwari Shrimadbhagwad Geeta’ श्रीमद्भगवद्गीता का एक अद्वितीय और दुर्लभ Yogic Commentary है, जिसे परम योग साधक योगिराज शैलेन्द्र शर्मा जी ने अपनी गहन साधना, गुरु-परंपरा से प्राप्त ज्ञान और प्रत्यक्ष अनुभूतियों के आधार पर लिखा है।
सामान्यतः उपलब्ध गीता-टीकाएँ दार्शनिक या शास्त्रीय दृष्टिकोण पर आधारित होती हैं, परंतु यह पुस्तक उन कुछ विरल ग्रंथों में से है जहाँ एक सिद्ध योगी स्वयं गीता के गूढ़ रहस्यों की व्याख्या करते हैं।
इस ग्रंथ में वर्णित है:
यह पुस्तक सामान्य पाठक से लेकर उच्च कोटि के साधकों तक सभी के लिए समान रूप से उपयोगी है, क्योंकि इसमें व्यक्त प्रत्येक शब्द लेखक की योगानुभूति से उपजा है।
Publisher: Siddha Siddhanta Yoga Academy (Through Aadya Industries)
Author: Yogiraj Shree Shailendra Sharma
First Published: 1 January 2019
Language: Hindi (Also Available English, Russian, Marathi, Punjabi, Sindhi)
Format: Paperback
Pages: 368
ISBN-10: 8195007600
ISBN-13: 978-8195007608
Weight: 567 g
Dimensions: 21 × 14 × 2 cm
₹300.00
Manjul Bhardwaj –
व्याख्या अद्वितीय है। इससे बेहतर व्याख्या मिलना असंभव है।
Rohit M –
Deep Insights. Highly Recommended! A deep insight into the hallowed text of Yogeshwari Shrimad Bhagwat Geeta from the yogic perspective.