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वासुगुप्त द्वारा प्राप्त शिवसूत्रों पर आधारित यह पुस्तक योगीराज शैलेन्द्र शर्मा जी की अनुभूतिपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत करती है, जो योग के वास्तविक सार को स्पष्ट करती है।
कश्मीर में खोजे गए शिवसूत्र सनातन धर्म के आध्यात्मिक ग्रंथों में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं।
करीब 250 साल पहले कश्मीर में वासुगुप्त नामक एक ब्राह्मण, जो शिव भक्त थे, रहते थे। एक बार उन्हें स्वप्न में स्वयं भगवान शिव द्वारा निर्देशित किया गया कि वे शंकर पर्वत पर एक गुफा खोजें। उन्हें कहा गया कि उसके अंदर उन्हें एक विशाल पत्थर मिलेगा, जिसे घुमाने पर उन्हें शिव द्वारा प्रदान किया गया आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होगा। उन्हें यह ज्ञान आत्मसात करके समाज में फैलाने के लिए कहा गया। अगले ही दिन वासुगुप्त कुछ अन्य लोगों के साथ उस स्थान पर गए। वहाँ उन्होंने वही गुफा और वही पत्थर देखा। पत्थर को घुमाने पर उन्होंने उस पर खुदी 77 सूत्रों को पाया। ये वही सूत्र हैं, जो महान शिव भक्त वासुगुप्त के आशीर्वाद से हमें प्राप्त हुए हैं। ये सूत्र तीन भागों में विभक्त हैं –
सभी विषयों के आदि गुरु भगवान शिव ने इन संकेतों को सूत्रों के रूप में उन भक्तों के लिए दिया, जो योग के गहन अभ्यास द्वारा आत्मसिद्धि प्राप्त करके सृष्टि के रहस्यों को जानने की आकांक्षा रखते हैं; और जो इन सत्यताओं को अपने जीवन में समझने और अनुभव करने में सक्षम होंगे।
इस पुस्तक में योगीराज शैलेन्द्र शर्मा जी ने अपने गहन साधना-अनुभव के आधार पर प्रत्येक सूत्र का सत्य, प्रामाणिक और अनुभूतिपूर्ण विवेचन प्रस्तुत किया है, जो योग के वास्तविक सार को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
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Rohit M –
An ancient text made easy to absorb … Concise yet invaluable content … Very useful for those on the yogic path.